Sarvesh Ambedkar

Sarvesh Ambedkar-प्रदेश अध्यक्ष (अनुसूचित जाति, जनजाति प्रकोष्ठ) समाजवादी पार्टी 

सर्वेश अंबेडकर


Sarvesh Ambedkar -
  

सर्वेश अंबेडकर - मेरे राजनीतिक एवं सामाजिक संघर्षमय जीवन की यात्रा


भारत में घृणित जातीय व्यवस्था के क्रूर हाथों से लहूलुहान 85 से 90% आबादी सामाजिक भेदभाव की भयंकर त्रासदी सदियों से झेलती आई है. यह विश्व का एक अजूबा है कि जातीय अभिशाप के चलते लाखों प्रतिभाओं को अवसर की वंचना के कारण, अंकुरण के पश्चात पुष्पित, पल्लवित होने की यात्रा के बीच में, कई-कई मर्तबा मर-मर कर जीने को मजबूर होना पड़ता है. 
भीषण धर्मान्धता और विकराल जातीय नफ़रत व उन्माद के कारण तड़पती और कराहती मानवता को सम्मान से जीने के लिए, समय समय पर दलित, पिछड़े समाज में जन्मे अनेकों संतों, गुरुओं एवं महापुरुषों ने भारत के विभिन्न भू-भाग पर आन्दोलन चलाये, जिनमें बाबा साहेब डा० भीमराव अंबेडकर का नाम सबसे अग्रणी है. 
बाबा साहब ने कड़े संघर्ष के बाद भारतीय संविधान में कानून बनाकर धर्म, वर्ण, जाति, लिंग, भाषा और क्षेत्रवाद के भेदभाव की असाध्य बीमारी का ऑपरेशन कर दिया. उन्होंने भारत के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकारों के साथ ही वयस्क मताधिकार देकर कुलीन तन्त्र का खात्मा कर दिया. राजा महाराजों का राजपाट समाप्त कर दिया, जो रानियाँ राजाओं को जन्म देतीं थी, उनकी नसबंदी कर बैलेट पेटी से सदियों से गुलाम समाज को हुक्मरान बनने का रास्ता खोल दिया.

समाज में जातिगत भेदभाव देखकर ही बड़े हुए, स्वयं अनुसूचित जाति से सम्बन्धित होने के कारण वे समाज की पीड़ा को न केवल भलीभांति समझते हैं, अपितु उनके विकास और सामाजिक भागीदारी व संविधान प्रदत्त अधिकारों का लाभ दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत भी रहते हैं, समतामूलक समाज की स्थापना हेतु दलित, पिछड़े समाज के सर्वांगीण विकास हेतु अग्रसर समाजवादी पार्टी अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश अम्बेडकर जी पूर्व में राज्यमंत्री रह चुके हैं, वर्तमान में समाजवादी पार्टी को विस्तार में दलित समाज को संगठित कर समाजवादी पार्टी में जोड़ने की अहम् भूमिका निभा रहे हैं. पूरे प्रदेश व पार्टी में उनकी सक्रियता के चर्चे दिन प्रतिदिन आम होते जा रहे हैं.
    
Sarvesh Ambedkar -

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा-दीक्षा 

सोने को चमकने के लिए उच्च तापमान में तपना पड़ता है, यदि सर्वेश जी के प्रारम्भिक जीवन के पहलुओं को करीब से देखें तो ऐसा प्रतीत कि वह स्वयं उस आभामय स्वर्ण जैसे हैं, जिसने सामाजिक भेदभाव के चलते छुआछूत रूपी भीषण ताप का सामना किया और अपने अथक परिश्रम के चलते आज उनकी चमक सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में देखी जा सकती है.

26 अप्रैल 1967, को जिला कन्नौज (तत्कालीन फर्रुखाबाद, अब कन्नौज) के काजीपुरवा (गुरुसहायगंज) गाँव में बेहद गरीब परिवार में जन्मे सर्वेश जी का बाल्यकाल में बलवीर सिंह नाम रखा गया था. साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि प्राईमरी शिक्षा के दौरान अछूत होने के कारण विद्यालय की कक्षा में सबसे पीछे बैठाया जाता था तथा वापसी में अक्सर उनके साथ मारपीट की जाती थी, प्यास लगने पर सबसे बाद में दूर से चुल्लू में पानी गिराया जाता था. हेडमास्टर उनसे क्लास में ही पांव दबवाते थे. 

उनका बस्ता, पट्टी और बुद्क्का फेंक दिया जाता था. क्लास में कथित उच्च जाति के सहपाठी ने उनकी बैठने वाली बोरी (टाट) को आगे से हटा कर फेंक दिया था तो उन्होंने गुस्से में उसके सर पर पट्टी मार दी. फिर तो उनकी आफत ही आ गयी, छोटेलाल वर्मा मास्टर साहब ने जातिवादी मानसिकता के चलते पेड़ से बांध कर बेरहमी से उनकी पिटाई की, जिससे उनके दोनों पैर एवं हथेलियां सूज गयीं. साथ ही स्कूल से नाम भी काट दिया गया. अगले दिन उनके बाबा रघुबर दयाल व पिता राम बख्श जी को दबंग परिजनों ने लाठी लेकर खलिहान में घेर लिया तथा सैकड़ों जातिसूचक गालियां देते हुए धमकाया कि दलित होकर बलबीर सिंह नाम कैसे रख लिया? यह तो बड़ी जाति वालों का नाम है, अगर नाम नहीं बदला तो तुम्हारे लड़के को जान से मार देंगे, इस पर बाबा एवं पिता जी ने भयभीत होकर हजारों मिन्नतें की, माफ़ी मांगी और मज़बूरी में नाम बदलने को राजी हो गए.15 दिन बाद पुनः कटा हुआ नाम लिखा गया, परन्तु अब बलबीर सिंह नाम न लिखकर उसे बदल कर सर्वेश कुमार लिखा गया.

सर्वेश जी के अनुसार, जैसे तैसे पांचवीं क्लास के बाद ग्राम कटकैया के स्वामी विवेकानंद जूनियर हाई स्कूल में कक्षा 6 में दाखिला हुआ. इस बड़े गाँव में सभी यादव/अहीर जाति के लोग रहते हैं. गर्मी के दिन थे, इंटरवल में सभी टीचर लोग स्टाफ रूम में थे, तभी अचानक स्कूल के प्रधानाचार्य श्री सदन सिंह यादव जी ने उनसे कहा कि सर्वेश बेटा प्यास लग रही है, कुएं से ताज़ा पानी ले आओ. मुझे लगा लगा कि मास्टर साहब गलती से मुझे बुला रहे है. फिर भी वह हाथ जोड़कर बोले कि हम चमार हैं साहब. यादव जी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि “सर्वेश तुम्हारे हाथ से पानी पीना है, छुआछूत पाखंड है.” मैं सकपका गया, फिर भी डरते डरते बाल्टी रस्सी लेकर पानी भर लाया, मास्टर साहब ने पानी पिया. इस घटना की खबर जंगल में आग की तरह सारे इलाके में फैल गयी. यादव जी पर सामाजिक दबाव बनाकर पंचायत के समक्ष माफ़ी मांगने को कहा गया. इस पर वह पंचायत में न जाकर अपनी जाति (यादव) से नाराज हो मोहम्दाबाद रोहिला गाँव रिश्तेदारी में एक हफ्ते के लिए चले गए. इसमें उनका सहयोग पडोसी टपकापुर गाँव के मास्टर शिवरतन पाल जी ने काफी दिया, वह भी छुआछूत के बहुत खिलाफ थे.

Sarvesh Ambedkar -

जब अपमान को ही बनाया मनोबल का आधार

उन्होंने बताया कि वह जैसे जैसे बड़े होते गए छुआछूत की बीमारी को ठीक से समझने लगे. इस घ्रणित मान्यता के खिलाफ जिन संतों, गुरुओं व महापुरुषों ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया, उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को पढ़ने लगा. बाबा साहब डॉ० आंबेडकर जी के संघर्ष व विचारों से अति प्रभावित होकर इलाके एवं रिश्तेदारियों में सामाजिक कार्यों में लग गये, सामाजिक भाषणों में बाबा डा० आंबेडकर जी के बारे में बताने लगे, जिससे कुछ लोग उनका मजाक बनाने लगे कि

“देखो नया आंबेडकर आया है.”

ऐसा कहकर लोग लज्जित कर मनोबल कमजोर करने लगे, परन्तु उसी अपमान को सर्वेश जी ने अपने जीवन का एक अंग बना डाला और साहस कर अपने नाम के साथ अंबेडकर जोड़ कर सर्वेश अंबेडकर हो गए और कई सामाजिक संस्थाओं में बढ़ चढ़ कर भूमिका अदा करने लगे. 

उसी दौरान खांडेदेवर ग्राम के सक्रिय सामाजिक नेता श्री रामचंद्र दोहरे जी के सम्पर्क में वह आये उनके साथ काफी सक्रिय रहे, उन्होंने दो बार बाबू जगजीवन राम जीत पुत्र सुरेशराम जी से मुलाकात कराई.

उन दिनों राम स्वरूप वर्मा जी के नेतृत्व में चल रहे अर्जक संघ के विचारों से प्रभावित होकर सर्वेश जी उनके द्वारा तत्कालीन भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी व राष्ट्रपति वी.वी. गिरी को निडरता से लिखे पत्रों को पुस्तिका के रूप में पढ़कर ऊर्जा एवं साहस से लबरेज हो गये.

Sarvesh Ambedkar -

सामाजिक सरोकार  

माननीय सर्वेश जी ने वर्ष 1997 से सिद्धार्थ सेवा संस्थान के माध्यम से कई जनपदों में जनसेवा के विभिन्न कार्य गरीब, निर्बल एवं असहाय लोगों में नशा मुक्ति जागरूकता अभियान, सामाजिक न्याय, स्वावलम्बन, बाढ़ पीड़ित सहायता शिविर, निशुल्क नेत्र परिक्षण, विकलांग सहायता शिविर, स्वरोजगार व विभिन्न क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए. वर्ष 1986 में कांशीराम साहेब के सम्पर्क में आकर बहुजन समाज पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए, जहाँ 30 वर्ष तक विभिन्न पदों पर रहते हुए संगठनात्मक सेवा की जो अधोलिखित प्रकार से है.

राजनैतिक एवं संगठनात्मक सेवाएं :

1. वर्ष1988 में बसपा युवा मोर्चा फर्रुखाबाद का जिलाध्यक्ष बनाया गया.

2. वर्ष 1996 से 2003 तक बसपा फर्रुखाबाद के जिला अध्यक्ष पद पर आसीन रहे.

3. वर्ष 2004 में बसपा प्रदेश सचिव व मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र प्रभारी नियुक्त हुए.

4. वर्ष 2005 में मध्य प्रदेश राज्य में ग्वालियर, चम्बल संभाग के चुनाव प्रभारी बने.

5. वर्ष 2006 में आगरा, अलीगढ, कानपुर मंडल के जोनल प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दी.

6. वर्ष 2007 में इटावा, मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र की सभी विधान सभा सीटों के चुनाव प्रभारी रहे.

7. वर्ष 2008 में प्रदेश महासचिव पाल सामाजिक भाईचारा कमेटी उप्र में 12 मंडलों के अंतर्गत सभी सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र के चुनाव प्रभारी नियुक्त रहे.

8. राजस्थान प्रदेश में जयपुर व जोधपुर संभाग में स्टार प्रचारक.

9. वर्ष 2010 में प्रदेश महासचिव ब्राह्मण सामाजिक भाईचारा कमेटी में रहे और उत्तराखंड राज्य के विधान सभा आम चुनाव में स्टार प्रचारक के तौर पर कार्यरत रहे.

10. वर्ष 2012 में 8 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी बने, कार्यकाल दो वर्ष रहा.

11. वर्ष 2014 में 20 मई को उत्तराखंड राज्य का प्रभारी बना जिसका कार्यकाल 1 वर्ष 7 माह रहा.


Sarvesh Ambedkar -

राजनीतिक सफरनामा   

राजनैतिक क्षेत्र में सर्वेश जी को बेहद अनुभव प्राप्त है. स्वर्गीय कांशीराम जी को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले सर्वेश जी ने अनुसूचित जाति को उनके अधिकारों की प्राप्ति कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया है. 

राजनैतिक उपलब्धियां :

1. वर्ष 2007 में उप्र सरकार द्वारा राज्य गन्ना बीज एवं विकास निगम में उपाध्यक्ष/राज्यमंत्री बना.

2. वर्ष 2010 में सर्वेश जी की पत्नी श्रीमती मुन्नी देवी कन्नौज से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई.

3. वर्ष 2010-11 में पत्नी श्रीमती मुन्नी देवी कन्नौज जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुई.

 
Sarvesh Ambedkar -

समाजवादी पार्टी में सेवाएं 

समाजवादी पार्टी के अंतर्गत 4 फरवरी 2017, को माननीय अखिलेश यादव जी (तत्कालीन मुख्यमंत्री उ.प्र.) के द्वारा सर्वेश जी जनपद औरैया की विधूना चुनावी रैली में अपने समर्थकों के साथ शामिल हो गए.

चुनाव प्रचार विधान सभा क्षेत्र :- कन्नौज, तिर्वा, छिबरामऊ.

तृतीय एवं चतुर्थ चरण जनपद :- फैजाबाद, बस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर, मऊ, आज़मगढ़, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, जौनपुर.

स्टार प्रचारक :

1. वर्ष 2017 में सर्वेश जी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव जी के आदेशानुसार हिमाचल प्रदेश में स्टार प्रचारक के रूप में 1 नवम्बर से 9 नवम्बर तक रहकर प्रचार कार्य किया.

2. वर्ष 2017 में ही माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के आदेशानुसार जनपद कानपुर देहात के सिकन्दरा विधानसभा उप चुनाव में सेक्टर 24 में प्रभारी रहकर प्रचार कार्य कर पार्टी को मजबूती देने में सर्वेश जी ने अहम भूमिका का वहन किया.

समाजवादी पार्टी एससी/एसटी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पद पर मनोनयन :

1. 7 फरवरी 2018 को उन्हें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव जी के द्वारा समाजवादी पार्टी में अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ उ.प्र. का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.

2. वर्ष 2018 में फूलपुर एवं गोरखपुर लोकसभा उप चुनाव में स्टार प्रचारक बनाकर संगठन की अहम जिम्मेदारी सौंपी गयी.

3. कैराना लोकसभा व नूरपुर विधान सभा उप चुनाव के अंतर्गत अपनी टीम के साथ स्टार प्रचारक के रूप में विजय हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

4. राजस्थान 2018 के विधान सभा आम चुनावों में स्टार प्रचारक रहकर कार्य किया और पार्टी को सशक्त बनाया.

कह सकते हैं कि सर्वेश अंबेडकर जी समाजवाद की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले एक ऐसे राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने भेदभाव के दंश को झेलते हुए हर बाधा को पार किया और दलित, पिछड़े समाज को ससम्मान जीवन का अधिकार दिलाने का हरसंभव प्रयास किया. उनकी इसी योग्यता के चलते माननीय अखिलेश जी ने उन्हें अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष का पद सौंपा, जिस पर सौ प्रतिशत खरा उतरते हुए सर्वेश जी मजबूती से संगठन के सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए समाज को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर कर रहे हैं.       

 
Sarvesh Ambedkar -

विकास के समान अवसर मिले, तो भारत करेगा उन्नति

समाज के छोटे-छोटे वर्गों से मिलकर ही सम्पूर्ण राष्ट्र बनता है. यदि इन लघु स्थानों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी तो राष्ट्र स्वयं प्रगति के पथ पर अग्रसर हो जाएगा. हमारे आस-पास के लोगों को धार्मिक पाखंड, ऊंच-नीच, छुआछूत आदि से आगे बढ़कर देखना होगा. सर्वेश जी का कहना है कि यदि सभी अमन–चैन से रहेंगे तो देश कल्याण की ओर अग्रसर हो जाएगा. साथ ही उनका मानना है कि आज किसान फसल का उचित मूल्य न मिलने और साक्षर व्यक्ति बेरोजगारी से स्वयं को मार रहा है. उन्होंने कहा कि जीएसटी और डिमोनेटाइजेशन के बाद से लोगों का रहना, जीना दूभर हो गया है. 

वर्तमान सरकार की नीतियों से सर्वेश जी इत्तेफाक नहीं रखते, उनका मानना है कि देश के सर्वांगीण विकास की दिशा में आज सरकार के प्रयास नाकाफी है, जिनमें परिवर्तन होने की आवश्यकता है. उनके अनुसार आज सरकार की अनुचित नीतियों के कारण देश का नौजवान बेरोजगार है, देश का अन्नदाता स्वयं भूखा मरने की कगार पर खड़ा है और आत्महत्या करने पर विवश है. वर्तमान में केंद्रीय सरकार की कार्यवाही को देखते हुए लेशमात्र भी मानवता देखने को नहीं मिलती है.

सर्वेश जी का कहना है कि देश के प्रगतिशील युवाओं को मेरा सन्देश है कि वे देश के संविधान की आत्मा कही जाने वाली प्रस्तावना के प्रमुख केंद्रीय बिंदुओं समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय को यदि आत्मसात करलें, तो देश को प्रगति की राह पर आगे बढ़ने एवं एक बार फिर से सोने की चिड़िया बनने से कोई भी नहीं रोक सकता है.