Sarvesh Ambedkar

प्रदेशप्रदेश अध्यक्ष (अनुसूचित जाति, जनजाति प्रकोष्ठ) समाजवादी पार्टी 

सर्वेश अंबेडकर


  
समाज में समानता एवं पिछड़े तबकों के विकास के लिए अग्रसर समाजवादी पार्टी के अंतर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रदेश अध्यक्ष माननीय सर्वेश अंबेडकर जी समाज में जातिगत भेदभाव देखकर ही बड़े हुए हैं. स्वयं अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण वें समाज के दलित वर्ग की पीड़ा को न केवल भलीभांति समझते हैं, अपितु उनके विकास के लिए बन रही तमाम नीतियों का लाभ उन्हें समतापूर्वक दिलवाने की दिशा में प्रयासरत भी रहते हैं. पूर्व में राज्यमंत्री रह चुके सर्वेश जी वर्तमान में समाजवादी पार्टी को विस्तृत एवं संगठित करने में अहम भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं.
    

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा-दीक्षा 

सोने को चमकने के लिए कठोर ताप में पकना पड़ता है, यदि सर्वेश जी के प्रारंभिक जीवन के पहलुओं को करीब से देखे तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह स्वयं भी उस आभामय स्वर्ण जैसे हैं, जिसने भेदभावपूर्ण सामाजिक व्यवस्था के चलते छुआछूत रूपी ताप का सामना किया और अपने अथक परिश्रम के चलते आज उनकी चमक सम्पूर्ण प्रदेश में देखी जा सकती है. कन्नौज के काजीपुर ग्राम से इंटर तक उन्होंने आरंभिक शिक्षा प्राप्त की. इससे आगे शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाने का उनका प्रमुख कारण आर्थिक तंगी एवं सामाजिक उत्पीड़न रहा. आईटीआई फर्रुखाबाद से इलेक्ट्रॉनिक एप्लीकेशन की शिक्षा के पश्चात उन्होंने टी.वी. एवं रेडियो इंस्टिट्यूट का संचालन भी किया. समाज में भेदभाव और उच्च वर्ग के दंभ की अधिकता देखिए कि सर्वेश जी के परिवार को उनका वास्तविक नाम बलवीर सिंह बदलना पड़ा. 

विकट परिस्तिथियों के बावजूद भी सर्वेश जी ने भीम राव अम्बेडकर, राम मनोहर लोहिया, तथागत गौतम बुद्ध आदि महापुरुषों के बारे में पढ़ा और साथ ही अपने निवास स्थान के पास ही उनकी जयंती भी मनाने लगे. लोगों ने इस पर भी उनका मज़ाक बनाना शुरू कर दिया, तथा "दूसरा अम्बेडकर आया है" यह कहकर चिढ़ाने का प्रयत्न किया, किन्तु इन सब परिस्थितियों से भागे बिना उन्होंने अपना अंतिम नाम ही "अंबेडकर" रख लिया. साथ ही उन्होंने युगपुरुष बाबा साहेब अंबेडकर जी को सम्मान देने के उद्देश्य से अपने इलाके में बहुत से स्थान पर उनकी प्रतिमाएं भी स्थापित करवाई.

 

राजनीतिक सफरनामा   

राजनैतिक क्षेत्र में सर्वेश जी को बेहद अनुभव प्राप्त है. स्वर्गीय कांशीराम जी को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले सर्वेश जी ने अनुसूचित जाति को उनके अधिकारों की प्राप्ति कराने की दिशा में बसपा के साथ मिलकर निरंतर कार्य किया. सर्वेश जी बसपा में फर्रुखाबाद से जिलाध्यक्ष भी रहे. उन्होंने कन्नौज में जिलाध्यक्ष के तौर पर कार्य किया तथा उनकी पत्नी कन्नौज से जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर कार्यरत रही. इसके अतिरिक्त सर्वेश जी 11 मंडलों में सहयोगी के तौर पर भी कार्यरत रहे. उन्होंने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश से प्रदेश महासचिव एवं पाल भाईचारा कमेटी, इत्यादि में प्रदेश महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दी. इसके साथ ही उनकी लोकप्रियता के चलते मध्यप्रदेश एवं राजस्थान में वे पार्टी के स्टार प्रचारक भी रहे.

उन्होंने बसपा पार्टी में रहकर पिछड़े वर्ग की उन्नति के लिए कार्य शुरू किया था, जिसे उन्होंने समाजवादी पार्टी से जुड़कर भी जारी रखा. समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने के उपरांत 4 फरवरी 2017 को सपा के राष्ट्राध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने सर्वेश जी को हिमाचल में स्टार प्रचारक के तौर पर भी भेजा. वे राज्यमंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं पार्टी को दे चुके हैं. वर्तमान में वह अनुसूचित जाति/ जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर समाजवादी पार्टी में कार्यरत रहकर समाज के उत्थान के लिए सतत क्रियाशील हैं. सर्वेश जी लगातार लोगों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयत्न करते हैं और कभी भी किसी दायित्वों से पीछे नहीं हटते. उन्हें पार्टी की तरफ से जो भी दायित्व दिया जाता है, उसे वह बखूबी अंजाम तक ले कर जाते हैं.

 

सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता 

भेदभाव और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं को समाज से सदैव के लिए हटाकर एक समतापूर्ण समाज की स्थापना के लिए आगे बढ़कर कार्य करने वाले सर्वेश जी का मानना है कि भले ही आज कानूनन रूप से छुआछूत की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है, परन्तु सामाजिक रूप से यह कहीं न कहीं आज भी अपनी जगह बनाए हुए है. जब तक हम अपने मानस से इस ओछी मानसिकता को नहीं निकालेंगे, तब तक छुआछूत जैसी सामाजिक विकृति समाप्त नहीं हो सकती है. सर्वेश जी के कथनानुसार आज मानवता को हर धर्म से ऊपर देखे जाने की आवश्यकता है, तभी विकसित समाज की स्थापना होकर सभी को समान अधिकारों की प्राप्ति होगी.  

 

विकास के समान अवसर मिले, तो भारत करेगा उन्नति

समाज के छोटे-छोटे वर्गों से मिलकर ही सम्पूर्ण राष्ट्र बनता है. यदि इन लघु स्थानों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी तो राष्ट्र स्वयं प्रगति के पथ पर अग्रसर हो जाएगा. हमारे आस-पास के लोगों को धार्मिक पाखंड, ऊंच-नीच, छुआछूत आदि से आगे बढ़कर देखना होगा. सर्वेश जी का कहना है कि यदि सभी अमन–चैन से रहेंगे तो देश कल्याण की ओर अग्रसर हो जाएगा. साथ ही उनका मानना है कि आज किसान फसल का उचित मूल्य न मिलने और साक्षर व्यक्ति बेरोजगारी से स्वयं को मार रहा है. उन्होंने कहा कि जीएसटी और डिमोनेटाइजेशन के बाद से लोगों का रहना, जीना दूभर हो गया है. 

वर्तमान सरकार की नीतियों से सर्वेश जी इत्तेफाक नहीं रखते, उनका मानना है कि देश के सर्वांगीण विकास की दिशा में आज सरकार के प्रयास नाकाफी है, जिनमें परिवर्तन होने की आवश्यकता है. उनके अनुसार आज सरकार की अनुचित नीतियों के कारण देश का नौजवान बेरोजगार है, देश का अन्नदाता स्वयं भूखा मरने की कगार पर खड़ा है और आत्महत्या करने पर विवश है. वर्तमान में केंद्रीय सरकार की कार्यवाही को देखते हुए लेशमात्र भी मानवता देखने को नहीं मिलती है.

सर्वेश जी का कहना है कि देश के प्रगतिशील युवाओं को मेरा सन्देश है कि वे देश के संविधान की आत्मा कही जाने वाली प्रस्तावना के प्रमुख केंद्रीय बिंदुओं समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय को यदि आत्मसात करलें, तो देश को प्रगति की राह पर आगे बढ़ने एवं एक बार फिर से सोने की चिड़िया बनने से कोई भी नहीं रोक सकता है.